हिमाचल: कोरोना की मार ने कैसे इस नेशनल लेवल खिलाड़ी को कर दिया मज़दूरी करने पर मजबूर

हिमाचल प्रदेश का ये खिलाड़ी कभी 200 मीटर रेस का सबसे तेज़ धावक हुआ करता था लेकिन समय की मार ने कोरोना के चलते इस खिलाड़ी को मज़दूरी करने पर विवश कर दिया है। अनूप सिंह राणा हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं और 8 बार नेशनल लेवल खेल प्रतिस्पर्धाओं में भाग ले चुके हैं। दौड़ने में इनके नाम कई राज्यस्तरीय रिकॉर्ड भी बने हुए हैं। यही नहीं ये प्रतिभाशाली खिलाड़ी बड़े-बड़े नामी इंस्टीट्यूट में खिलाड़ियों को ट्रेनिंग भी देते रहे हैं।

अनूप राणा ने साल 2006 में खेल कोटे के अंतर्गत नौकरी पाने के लिए खेल विभाग में अपना रेजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन 14 साल बीत गए हैं और सरकार की तरफ़ से कोई मदद नहीं मिली है। उन्हें ये कहकर नौकरी नहीं दी गयी कि जिला लेवल की खेल प्रतियोगिताओं में खेलने के 42 दिन के अंदर ही रजिस्ट्रेशन कराए खिलाड़ियों को ही नौकरी के लिए पात्र माना जाता है।

अब ये खिलाड़ी अपने स्नातक के कॉलेज के बाहर ही दिहाड़ी मज़दूरी करते देखा जा रहा है। इसी विश्वविद्यालय का कभी अनूप ने 2 बार नेशनल लेवल इंटर-यूनिवर्सिटी खेल प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व भी किया था। आईआईटी मंडी, डीएवी हमीरपुर और पंजाब के एक प्राइवेट विश्विद्यालय में भी ये बतौर प्रशिक्षक कई खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। खेल के प्रति इनका पैशन इतना है कि अभी भी जब समय मिलता है वे ऑनलाइन ही खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने की कोशिश करते हैं। लगातार 3 साल 2004 से 2006 के बीच ये हिमाचल के सबसे तेज़ धावक भी चुने गए और कई प्रदेश स्तरीय रिकॉर्ड इनके नाम हैं।