हिमाचल: डंडों के सहारे कुर्सी को बांधकर गर्भवती महिला को 8 किमी दूर सड़क तक पहुंचाया, फिर सड़क पर दिया बच्चे को जन्म

जहां एक ओर देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के अब भी कई हिस्से ऐसे हैं जहां तक जीने की मूलभूत सुविधाएं भी मौजूद नहीं है। ऐसा ही एक गांव कुल्लू जिले की सैंज घाटी में स्थित है। यहां के ग्रामीणों को अभी तक मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हुई हैं। आपको बता दें कि इस घाटी की ग्राम पंचायत गाड़ापारली का एक भी गांव अभी तक सड़क से नहीं जुड़ पाया है। इसी के साथ सोमवार को इस पंचायत के मेल गांव की एक गर्भवती महिला मथुरा देवी को प्रसव पीड़ा हुई तो उसे डंडों पर कुर्सी बांधकर पैदल करीब आठ किलोमीटर दूर निहारनी सड़क तक पहुंचाया गया। वहीं आपको बता दें कि बरसात में संकरे रास्ते से महिला को सड़क तक ले जाने में छह घंटे लग गए। इसके बाद जब महिला की प्रसव पीड़ा अधिक होने लगी तो सड़क पर ही प्रसव करवाना पड़ा। वहीं प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों को उप स्वास्थ्य केंद्र सैंज ले जाया गया, जहां दोनों का स्वास्थ्य ठीक बताया गया है। 

इसी के साथ ग्राम पंचायत प्रधान यमुना देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को मथुरा देवी को प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें डंडों पर उठाकर उपचार के लिए ले जाना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन और सरकार से पंचायत में सड़क के निर्माण की मांग लगातार की जाती रही है लेकिन अब भी स्थिति जस की तस है। इसी के साथ उन्होंने आगे यह भी कहा कि पिछले करीब ढाई हफ्तों के समय में तीन महिलाओं को उपचार के लिए इस प्रकार उठाकर ले जाना पड़ा है। 

आपको बता दें कि सड़क सुविधा न होने के कारण ग्राम पंचायत गाड़ापारली की जनता की परेशानियां लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। इसी के साथ इन ग्रामीणों को राशन से लेकर निर्माण संबंधी भारी भरकम सामग्री भी पीठ पर उठाकर पैदल करीब 8 से 15 किलोमीटर चलकर लानी पड़ती है। इसी के साथ यहां के ग्रामीणों को सबसे अधिक समस्या किसी के बीमार होने पर आती है। वहीं इन ऊबड़-खाबड़ और फिसलन भरे रास्तों पर मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाना ग्रामीणों के लिए हमेशा से ही परेशानी रहा है।